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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल), पीएसीएल कंपनी ने की ठगी, पीएसीएल कंपनी ने कैसे बनाया ठगी का शिकार, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी, पीएसीएल कंपनी की प्रॉपर्टी बेचेगी लोढा समिति उत्तराखंड के 23 हजार लोगों के करीब तीन हजार करोड़ रुपये पीएसीएल कंपनी में फंस गए। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सेबी के देहरादून कार्यालय में अब तक फ्रॉड के शिकार लोगों की इतनी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। सेबी के मुताबिक, जिन लोगों के साथ धोखा हुआ है, वह सेबी कार्यालय में अपने कागजात जमा करा सकते हैं। यह सभी शिकायतें उनके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोढा समिति को भेजी जा रही हैं। पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) ने सस्ती जमीनें और मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में लोगों के साथ ठगी की। सेबी के माध्यम से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोढा समिति का गठन किया।

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पीएसीएल कंपनी में फंसे 23 हजार लोगों के 3 हजार करोड़ रुपये

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पीएसीएल कंपनी में फंसे 23 हजार लोगों के 3 हजार करोड़ रुपये

पीएसीएल कंपनी में फंसे 23 हजार लोगों के 3 हजार करोड़ रुपये
January 03
15:41 2018

देहरादून।

उत्तराखंड के 23 हजार लोगों के करीब तीन हजार करोड़ रुपये पीएसीएल कंपनी में फंस गए। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सेबी के देहरादून कार्यालय में अब तक फ्रॉड के शिकार लोगों की इतनी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। सेबी के मुताबिक, जिन लोगों के साथ धोखा हुआ है, वह सेबी कार्यालय में अपने कागजात जमा करा सकते हैं। यह सभी शिकायतें उनके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित लोढा समिति को भेजी जा रही हैं।

पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) ने सस्ती जमीनें और मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर उत्तराखंड में भी बड़ी संख्या में लोगों के साथ ठगी की। सेबी के माध्यम से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लोढा समिति का गठन किया।

समिति को आदेश दिया गया कि पीएसीएल कंपनी की सभी प्रॉपर्टी बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाया जाए। करीब एक साल से यह प्रक्रिया चल रही है। सेबी कार्यालय में बीते दो वर्षों में पीएसीएल कंपनी के फ्रॉड के शिकार 23 हजार लोग सामने आ चुके हैं। इनकी शिकायतों का  बंडल सेबी ने लोढा समिति के मुंबई स्थित कार्यालय को भेज दिया है। अभी भी शिकायतें आने का सिलसिला जारी है।

आसान नहीं है पैसा मिलने की राह

लोढा समिति ने प्रॉपर्टी बेचने का सिलसिला शुरू किया तो इसमें अड़चनें सामने आने लगीं। दरअसल, पीएसीएल की जमीनों पर सबसे ज्यादा विवाद हैं। कहीं लोगों ने कब्जा किया हुआ है तो कहीं कंपनी का ही कब्जा नहीं है। ऐसे में बीते एक साल से उत्तराखंड के यह 23 हजार पीड़ित पैसा मिलने की आस में बैठे हैं।

ऐसे हुई ठगी

पीएसीएल कंपनी ने खुद को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की कंपनी के तौर पर प्रस्तुत किया। इस आधार पर कंपनी ने लोगों से पैसा लिया और देशभर में अलग-अलग जगहों पर जमीन खरीदने में दिखाया। उन्हें बताया गया कि सस्ती जमीन पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर बराबर का मुनाफा निवेशकों को भी मिलेगा। कई मामले तो ऐसे भी सामने आए कि बिहार की महिला से पैसा लेकर पश्चिमी बंगाल में जमीन खरीदना दिखाया गया। जब जांच हुई तो पता चला कि वहां कोई जमीन ही नहीं खरीदी गई। हालांकि कंपनी ने देश में अपना बड़ा लैंड बैंक बनाया था, जिसमें पंजाब के उस इलाके में भी जमीन खरीदनी दिखाई गई थी जो कि सीमा से जुड़ा हुआ है और जहां कोई आबादी ही नहीं है।

पीएसीएल की जमीन

पीएसीएल कंपनी की देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में भी कई हेक्टेयर जमीन है।  यह जमीन निवेशकों से पैसा लेकर कंपनी ने खरीदी थी। अब निवेशक इस इंतजार में हैं कि लोढा समिति इस जमीन को बेचे और उनका पैसा किसी तरह उन्हें वापस मिल सके।

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